यूपी बोर्ड : जालसाजों तक परीक्षार्थियों के मोबाइल नंबर पहुंचने की होगी जांच

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वाराणसी। जालसाज तो जालसाजी करेंगे ही। असली सवाल यह है कि 2019 यूपी बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों का मोबाइल नमबर जालसाजों तक पहुंचा कैसे ? इसका सीधा जवाब देने के लिए यूपी बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय तैयार नहीं है। बस इतना ही बताया जा रहा है कि छात्रों, अभिभावकों और तमाम प्रधानाचायरे को निर्देश दिया गया है कि वह ऐसे जालसाज व फर्जी नम्बरों के झांसे में न आयें। स्थानीय पुलिस , संबंधित विद्यालय प्रशासन अथवा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तत्काल संपर्क करें। स्थानीय पुलिस ने शिकायत दर्ज कराने के लिए अपना मोबाइल नम्बर 9454404404 जारी कर दिया है।

एक तरफ हजारों छात्र यूपी बोर्ड रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। वही बिहार और झारखंड के जालसाज दलाल छात्रों को मनमाने रिजल्ट , बेहतर अंक प्रतिशत और फेल होने से बचाने के लिए उनसे कथित रुप से पैसे तक की मांग कर रहे हैं। इस बारे में यूपीबोर्ड प्रशासन प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को सतर्क कर चुका है। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. वीपी सिंह ने बताया कि इसकी जानकारी मिलते ही उन्होंने बोर्ड को सूचित कर दिया था। उसके बाद बोर्ड सक्रिय हुआ और एडवायजरी जारी की गयी। उन्होंने कहा कि यह छात्र व उनके अभिभावकों का मानसिक दोहन व शोषण है।

पुलिस भी मान रही है कि इस तरह के कॉल फर्जी नम्बरों से किये जा रहे हैं जिसकी पहचान स्थापित करना आसान नहीं है। वही यूपीबोर्ड का कहना है कि दसवीं बारहवीं का रिजल्ट लगभग तैयार है। कभी भी इसकी घोषणा की जा सकती है। हमारी साकारीात्मक गोपनीयता को भेदना किसी के लिए आसान नहीं है। सूत्रों का कहना है कि यूपी बोर्ड कुछ खास मोबाइल नम्बरों की गोपनीय जांच करा रहा है।

वही कई अभिभावक यूपी बोर्ड के तर्क व बचाव से असहमत हैं। उनका कहना है यदि रिजल्ट गोपनींय तरीके से तैयार किये जाते हैं। कापियों की कोडिंग की जाती है तो छात्रों का मोबाइल नम्बर जालसाजों तक कैसे पहुंच जा रहा है। सिर्फ यह कहने से काम नहीं चलेगा कि छात्र और उनके अभिभावकों के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और खाते आदि का नम्बर कई सरकारी और गैरसरकारी कार्यालयों में जमा कराये जाते हैं। इस काम को कुछ खास ऐजेंसियां करती हैं। यदि यह सही है तो भी वहां हजारों लाखों आवेदन-पत्र होते हैं। जालसाज उसमें से परीक्षार्थियों के मोबाइल नम्बर की पहचान कैसे कर लेते हैं। यूपी बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को भी एक आंतरिक विभागीय जांच कराना चाहिए।

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विकास ने वर्ष 2014 से टीवी रिपोर्ट के रूप में काम करना शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने कई समाचार चैनल और समाचार वेबसाइट में काम किया। उसके बाद वर्ष 2016 में विकास ने रोजगार रथ में वरिष्ठ संपादक के रूप में काम करना शुरू किया।