एक ही नम्बर का ई-वेबिल प्रयोग कर किया गया फर्जीवाड़ा , की गई टैक्सचोरी

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एक ही नम्बर का ई-वेबिल प्रयोग कर किया गया फर्जीवाड़ा , की गई टैक्सचोरी

लखनऊ। गुड्स एन्ड सर्विस टैक्स ( जीएसटी) में माल के परिवहन के लिए ई-वेबिल का होना जरूरी है। ये फार्म व्यापारी खुद डाउन लोड करते हैं| माना जाता है कि जिस कारोबारी ने माल के परिवहन के लिए जितने ई-वेबिल डाउन लोड किये कारोबारी ने उतनी ही बार माल मंगाया और उसी पर टैक्स की देनदारी बनती है, लेकिन इधर कई ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, जिसमें ये पता चला है कि एक ही नम्बर के बिल का प्रयोग एक से अधिक बार करके टैक्सचोरी की गयी है। ऐसे ही एक मामले का खुलासा वाणिज्य कर विभाग की सचल दल इकाई नम्बर दो के असिस्टेन्ट कमिश्नर ने वनस्पति घी लेकर आने वाली की जांच में किया हैं। देखने में तो ये मामला सामान्य सा लगता है, लेकिन ये प्रकरण तीन तरह से खास है इसलिए प्रदेश भर के सचल दल अधिकारियों को इस पर खास नजर रखने की जरूरत है। कहा जा सकता है कि जिस तरह से नवनियुक्त कमिश्नर वाणिज्य कर अमृता सोनी टैक्सचोरी के तरीकों का अध्यन कर रही हैं, उनके लिए भी ये मामला नए पाठ्यक्रम की तरह होगा।

असिस्टेन्ट कमिश्नर डा. मनोज शुक्ला ने एक गाड़ी चेकिंग के लिए रोकी। इस गाड़ी में वनस्पति घी था, जो कि लखनऊ के बिजनौर से बाराबंकी जा रही थी। गाड़ी चालक ने सचल दल अधिकारी को जो ई-वेबिल दिखाया वह रात करीब 12 बजे डाउन लोड किया गया था, उसमें बाराबंकी की दूरी 175 किलों मीटर दिखायी गयी है और माल को बिजनौर से बाराबंकी तक पहुंचाने के लिए तीन दिन का समय मांगा गया था। सचल दल अधिकारी ने गाड़ी को माल समेत सीज कर दिया,क्योंकि ई-वेबिल में करापंचन की मंशा साफ प्रतीत हो रही थी। पहला ये कि कोई भी व्यापारी माल के मूवमेन्ट से कुछ देर पहले ही ई-वेबिल लोड करता है, क्योंकि ई-वेबिल में समय बहुत महत्व रखता है। इस प्रकरण में कारोबारी ने बाराबंकी की दूरी 175 किलो मीटर दिखायी है, जबकि लखनऊ से बाराबंकी की दूरी मात्र 50 किलो मीटर ही है और बाराबंकी तक माल पहुंचाने के लिए तीन दिन का समय मांगा गया है, जबकि इतने समय में तो माल एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त में पहुंच जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात ये भी है कि इससे पहले इसी यूनिट ने इसी फर्म की एक गाड़ी करीब एक माह पहले भी पकड़ी थी, जिसमें ये कारोबारी उस समय घी के विक्रेता के रूप में सामने आया था, जबकि इस बार क्रेता के रूप में सामने आया है। इस बार गाड़ी पकड़ी जाने पर कारोबारी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की तलील को सुनने व प्रस्तुत साक्ष्यों को देखने के बाद ये माना की सचल दल अधिकारी ने जिस आधार पर गाड़ी को जांच के लिए रोका है, वहा सही है। कोर्ट ने कारोबारी को टैक्स व जुर्माने के तौर पर Rs 6 लाख 80 हजार 433 की धनराशि जमा कराने के निर्देश दिये। इससे पहले इसी तरह से मुरादाबाद से अयोध्या के लिए जा रहे बर्तन से भारी एक गाड़ी व लखनऊ के कुर्सी रोड क्षेत्र से हरसिंगार पान-मसाला की एक गाड़ी जो कि शाजहांपुर के लिए पान-मसाला लोड करती थी और आस-पास के जनपद में उतार कर एक ही नम्बर के ई-वेबिल का प्रयोग कई बार कर रही थी।

इसका खुलासा टोल टैक्स के सीसीटीवी फूटेज से हो चुका है, क्योंकि गाड़ी टोल टैक्स से गुजरी ही नही थी। इन सभी प्रकरणों में एक समानता ये नजर आ रही है कि अगर एक ही ई-वेबिल पर एक से अधिक बार वनस्पति लोड हो रहा था, पान-मसाला लोड हो रहा था और बर्तन भी लोड किये जा रहे थे, तो ये बात मानी जा सकती है कि ई-वेबिल पर पहली बार जो माल भेजा गया था, वह तो घोषित था और बाकी जितनी बार माल भेजा गया वह अघोषित ही। यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि टैक्सचोरी का प्रथम स्त्रोत वे फैक्ट्रियां है, जहां पर अघोषित माल का उत्पादन किया जा रहा है। जिस पर इन कार्रवाई ने मोहर लगा दी है, अब एसआईबी के अधिकारियों को जगने की जरूरत है।

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विकास ने वर्ष 2014 से टीवी रिपोर्ट के रूप में काम करना शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने कई समाचार चैनल और समाचार वेबसाइट में काम किया। उसके बाद वर्ष 2016 में विकास ने रोजगार रथ में वरिष्ठ संपादक के रूप में काम करना शुरू किया।