भारतीय सेना को अब नहीं होगी गोला बारूद की किल्लत जानिए आखिर क्यों ?

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भारतीय सेना को अब नहीं होगी गोला बारूद की किल्लत जानिए आखिर क्यों ?

नई दिल्ली| थल सेना अपने हथियारों के लिए देश में ही गोला-बारूद का उत्पादन कराएगी, कई वर्षों से चली आ रही चर्चा के बाद सेना ने 15000 करोड रुपए के प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दे दिया है दरअसल मुख्य गोला बारूद बहुत तेजी से देश में घटते जा रहे थे इसकी चिंता थल सेना को काफी दिनों से सता रही थी काफी सालों से वह इसी चिंता में थे सरकार का यह कदम थल सेना की इस समस्या को दूर करने के लिए उठाया गया है| इस कदम का मकसद गोला-बारूद के आयात में होने वाली लंबी देरी और इसका भंडार घटने की समस्या का हल करना है|इसके साथ ही, चीन के तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के मुद्दे पर भी विभिन्न सरकारों ने चर्चा की थी.

सूत्रों के मुताबिक बताया जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए 11 कंपनियों को शामिल किया गया है और इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की रक्षा की जिम्मेदारी थल सेना और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी करेंगे, और सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि पिछले महीने एक थल सेना के कमांडर हो का सम्मेलन हुआ था इस सम्मेलन में इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा हुई थी|

सेना प्रमुख बिपिन रावत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना के लिए हथियार और गोला-बारूद की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दे रहे हैं आपको बता दें कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना हमारे भारत की थल सेना है और वही अधिकारियों ने गोला बारूद का स्वदेशीकरण परियोजना मैं ऐसा सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा.
निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक गोला-बारूद का भंडार एक महीने लंबे युद्ध के लिए पर्याप्त होना चाहिए.

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नियामत खान रोजगार रथ में संवाददाता के पद पर कार्यरत है। नियामत खान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के क्षेत्र में स्नातक की हासिल की है। नियामत खान को पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी अच्छा अनुभव है। नियामत खान की लेखन, पत्रकारिता, संगीत सुनना में रुची है।