इस कारण से अब नहीं दिए जाएंगे कन्यादान योजना के तहत 51 हजार

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भोपाल। सीएम कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद कन्यादान योजना में शासन की ओर से दी जाने वाली सहयोग राशि 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार कर दी थी| 7 मई को अक्षय तृतीया पर सामूहिक विवाह सम्मेलनों में आयोजित किया जाता है और इस सम्मेलनों में कन्यादान योजना के तहत राशि का वितरण किया जाता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं नहीं होगा, क्योंकि देश में लोकसभा चुनाव होने के कारण चुनाव आचार संहिता लगी हुई है। इसका असर यह कि कई आयोजकों ने सामूहिक विवाह सम्मेलन ही स्थगित कर दिए हैं।

सरकार द्वारा सहायता ना मिलने के कारण इस बार आयोजन समितियों ने अक्षय तृतीया पर विवाह सम्मेलन नहीं कराने का निर्ण्य  लिया है। इससे वर-वधू पक्ष के लोग परेशान हैं। अब वे इस आस से सामाजिक न्याय विभाग के चक्कर लगा रहे हैं कि शायद शादियों की मंजूरी मिल जाए और तय तारीख पर विवाह हाे सकें। बता दे कि शादियों का सीजन शुरू हाे चुका  है। शहर में सामाजिक संस्थाएं मुख्यमंत्री कन्यादान और निकाह योजना के तहत विवाह सम्मेलनों का आयोजन करते हैं। हर साल 2 हजार से ज्यादा विवाह और निकाह जिले करवाए जाते हैं।

इस योजना के तहत सरकार दुल्हनों को उपहार के रूप में 51 हजार रुपए देती है। इसमें 48 हजार रुपए दुल्हन के खाते में जाते हैं और 3 हजार रुपए संबंधित संस्था को व्यवस्था बनाने के लिए दिए जाते हैं। चूंकि आचार सहिता लगी हुई इसलिए सामाजिक न्याय विभाग ने नगर निगम को बजट देने से इंकार कर दिया है।

जारी की जा चुकी हैं विवाह सम्मेलन की तिथि

योजना के तहत होने वाले सामूहिक विवाह सम्मेलनों के लिए सामाजिक न्याय विभाग तारीखें भी जारी कर चुका है। इसमें जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों से कम से कम 50-50 कन्याओं की शादी कराने का लक्ष्य जनपद सीईओ और नगरीय निकायों के सीएमओ और कमिश्नर को दिया गया था, लेकिन ऐन वक्त पर आचार संहिता लगने की वजह से इस योजना का लाभ मिलना बंद हो गया है। यह सम्मेलन 7 और 30 मई, 4, 17 और 25 जून, 6 और 10 जुलाई, 22 और 28 नवंबर, 5 और 12 दिसंबर को आयोजित करने हैं।

निगम से नहीं मिल रही है अनुमति

विनोद पलया, अध्यक्ष, मां वैष्णो जनकल्याण समिति ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन 600 से ज्यादा जोड़ों का विवाह  हमारी समिति द्वारा कराया जाता है। आचार संहिता का हवाला देकर निगम ने शादियों के लिए होने वाली व्यवस्था नहीं कराने के लिए कहा है। अनुमति मिल नहीं रही और लोग रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आ रहे हैं।

सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त संचालक मनोज तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह और निकाह योजना के तहत दुल्हनों को मिलने वाली राशि 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार कर दी गई है। चूंकि आचार संहिता लगी है और योजना मुख्यमंत्री के नाम पर है, यदि ऐसे में शादियां कराते हैं तो यह संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। अब आयोजकों के सामने परेशानी यह है कि उन्हें सम्मेलन का आयोजन अपने खर्च पर करना पड़ेगा। ऐसे में उन्हें मिलने वाली 3 हजार रुपए की मदद भी नहीं मिल पाएगी।

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