अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई में एलडीए हुआ फेल, धारा-27 की नोटिस के बाद फाइल बंद

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लखनऊ । शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए एलडीए ने कार्ययोजना तैयार की है। मिसिंग लिंक ट्रैफिक व ग्रेड सेपरेटर बनाने पर करोड़ों पए खर्च होंगे मगर ट्रैफिक व्यवस्था में बाधक बने पाकिर्ंगों पर कब्जों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बड़े पैमाने पर गली.मोहल्लों में एकल आवासीय नक्शे पर अपार्टमेंट बनाने का खेल चल रहा है। एलडीए के इंजीनियर और बिल्डर का गठजोड़ स्मार्ट सिटी की राह पर पानी फेर रहा है।

संबंधित थाने की पुलिस निर्माण कार्य रोकने के एवज में बिल्डरों से लाखों पए की वसूली करती है। सीतापुर रोड पर योजनाए राम राम बैंक चौराहा के पास, आर्शिवाद प्लाजा, केडीटी प्लाजा, सेक्टर ई में एसकेजी बिल्डर्स, ए सिंह एवं सुशीला सिंह के काम्प्लेक्स में, आन्नद कुमार अग्रवाल, मेसर्स तारिक बिल्डर्स, विक्रम गुप्ता सेक्टर एच, कृष्णा अग्रवाल एवं गोपाल अग्रवाल टीजी एक 21 नार्थ निराला नगर मनोज कुमार सेक्टर के अलीगंज गिरधारी लाल शुक्ला सेक्टर एफ अलीगंज सरोज सहाय सेक्टर ई अलीगंज शिव कुमार गुप्ता सेक्टर पी अलीगंज एमएलएम मांटेसरी स्कूल सेक्टर एम अलीगंज टिनी टवाट्स भवन सेक्टर एम अलीगंज पाकिर्ंग स्थल पर दुकानें व विद्यालय चल रहे हैं। एलडीए इनके विरुद्ध धारा.27 के अंतर्गत कार्रवाई प्रस्तावित की थी। मगर हुआ कुछ नहीं।

वीआईपी मार्ग पर बने अपार्टमेंटों में भी अवैध कब्जे :

पाकिर्ंग स्थलों पर सबसे अधिक अवैध कब्जे वीआईपी इलाकों में हैं। यहां अरूणांचला अपार्टमेंट, क्ले स्कवायर, कीर्ति शिखर अपार्टमेंट हुसैनगंज, अनिल विरमानी नील गंगा अपार्टमेंट एपी सेन रोड, ग्रीन हाईट अपार्टमेंट लाल बहादुर शास्त्री मार्ग हर्शित अपार्टमेंट एपीसेन रोड, दीप होटल विधानसभा राज होटल विधानसभा आरिफ पैलेस माल एवेंन्यू होटल मंगल मयूर मेरा मन स्टेशन रोड चिंटल हाउस स्टेशन रोड रीजेंसी प्लाजा पार्क रोड होटल गोल्डन ट्यूलिप राधाकृष्ण भवन पार्क रोड एएफ टावर सरन चैम्बर न्यू जनपथ अशोक मार्ग श्रीराम टावर कूल ब्रेक बिल्डिंग अशोका टावर पीके बिल्डर्स सिटी सेंटर सफायर कोर्ट जापलिंग रोड समेत वीआईपी क्षेत्र में ही लगभग 40 अपार्टमेंटों के बेसमेंटों में अवैध रूप से कब्जे है।शासनादेश के अनुसार प्राधिकरण में छह माह पर सहायक व तीन माह पर अवर अभियंताओं का क्षेत्र बदलने के निर्देश हैं। मगर इंजीनियरों ने न तो सूची बनायी और न ही अफसरों ने कोई कार्रवाई की।