हाईकोर्ट ने दिया शिक्षकों के हित में अपना फैसला, मिली राहत

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हाईकोर्ट ने दिया शिक्षकों के हित में अपना फैसला , मिली राहत

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व डीएसएसएसबी सहित निगमों को आदेश दिया है कि वह रिक्त पड़े प्रधानाचायरे के 747 पद, शिक्षकों के 20 हजार पद व निगम स्कूलों के छह हजार पदों को जल्द भरे। न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने सरकार, बोर्ड व निगमों से आगे की कार्रवाई कर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है

आरै सुनवाई 1 मई के लिए स्थगित कर दी है। कोर्ट ने यह निर्देश अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में सुनवाई करते हुए दिया। उसने डीएसएसएसबी से कहा कि वह अतिरिक्त 10593 शिक्षकों की भर्ती के लिए शीघ्र विज्ञापन जारी करे।

 स्कूलों में 20 हजार से ज्यादा शिक्षकों की होगी भर्ती :

दिल्ली सरकार भी अपने स्कूलों में 20 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती करे। साथ ही 15 हजार शिक्षकों के पदोन्नति की शीघ्र प्रक्रिया शुरू करे और उन्हें अगला पद दे। कोर्ट ने निगमों से भी कहा कि वे भी अपने स्कूलों में छह हजार रिक्त शिक्षकों के पद को भरने की प्रक्रिया शुरू करे।

साथ ही वह अपने स्कूलों में छात्रों के खेलने की व्यवस्था करे और स्कूलों की पहचान कर वहां फुटबॉल गोल पोस्ट लगवाए। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह जिन 50 प्राधानाचायरे को दूसरे विभाग में काम पर लगा रखा है, उन्हें एक हफ्ते में वापस बुलाये और उन्हें अपना काम सौंपे। सभी कोई इस सब मुद्दों पर एक साथ जवाब दाखिल करे। हाईकोर्ट ने यह निर्देश एक संस्था सोशल जूरिस्ट की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

संस्था के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा था कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में 20 हजार शिक्षकों के पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं तथा 15 हजार पद पदोन्नति से भरे जाने हैं। इसके अलावा अतिरिक्त शिक्षकों के 10593 पद रिक्त हैं। इसके लिये डीएसएसबी ने अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इसके अलावा निगम के स्कूलो में छह हजार पद रिक्त हैं।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों में प्रधानाचायरे के 923 पद हैं जिनमें केवल 126 पदों पर प्रधानाचार्य नियुक्त हैं। स्कूलों में प्रधानाचायरे के 747 पद रिक्त हैं। सरकारी स्कूलों में 126 प्रधानाचायरे में से भी 50 प्रधानाचायरे को दिल्ली सरकार ने कोर्ट समेत अन्य विभागों में लगा रखा है। इससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रहा है।   

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