पूर्व डीएसपी भदौरिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज

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पूर्व डीएसपी भदौरिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज

नोएडा। सेक्टर-47 निवासी पूर्व डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया के खिलाफ कोतवाली सेक्टर-49 में आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया गया है। मामले में एक सिपाही ने डीजीपी से शिकायत की थी। जिसके बाद मामले की जांच विजिलेंस के इंस्पेक्टर अरविंद कुमार को सौंपी गई। जांच के बाद अरविंद कुमार ने पूर्व डीएसपी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी बनाते हुए कोतवाली में बीते बुधवार को केस दर्ज कराया है। मेरठ विजिलेंस के इंस्पेक्टर अरविंद कुमार द्वारा दर्ज एफआईआर कहा गया है कि डीजीपी ने पूर्व डीएसपी हर्ष वर्धन भदौरिया के खिलाफ की गई शिकायत की जांच मुझे सौंपी गई थी।

जांच में पाया गया कि हर्षवर्धन भदौरिया की नियुक्ति उप्र पुलिस में 30 मई 1981 में बतौर उप निरीक्षक के पद पर हुई थी। सेवा में आने के बाद एक जनवरी 2003 से 29 मई 2017 तक आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई। इस अवधि के दौरान आय-व्यय की गणना की गई, तो वेतन भत्तों, एरियर और बैंक से कुल आय आठ लाख 32 हजार 324 रपए हुई है। जबकि इस अवधि में हर्षवर्धन भदौरिया ने पारिवारिक भरण-पोषण, भूखंड आदि क्रय करने पर दस करोड़ 63 लाख 76 हजार 352 रपए हैंहै। ऐसे में भदौरिया की निर्धारित आय से नौ करोड़ 80 लाख 53 हजार 325 यानि 1178.09 प्रतिशत अधिक है।

एफआईआर में आरोप है कि हर्ष भदौरिया से आय से अधिक संपत्ति के श्रोतों का विवरण सही से नहीं दे सके। जिसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत हर्ष भदौरिया के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस मामले में पूर्व डीएसपी भदौरिया का कहना है कि दो जनवरी 2017 को मैंने बीमारी के चलते राष्ट्रपति के सतर्कता विभाग, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, सीबीसीआईडी आदि सभी विभागों से एनओसी प्राप्त कर, डीजीपी और शासन की संस्तुत्ति पर स्वैक्षिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग में तैनात सिपाही सुशील कौशिक मुझे ब्लैकमेल कर रहा था। मैं उसके दबाव में नहीं आया तो उसने डीजीपी से मेरी झूठी शिकायत की है।

एंटी करप्शन विभाग ने जांच के दौरान मेरी आय की गणना मेरे सेक्टर-47 स्थित घर के मौजूदा कीमत के हिसाब से की। जबकि 1999 में यह प्लॉट मैंने प्राधिकरण से 10 लाख रपए में आवंटित कराया था जिसकी कीमत भी पांच साल की किस्तों में अदा की थी। इस घर को बनवाने के लिए मैंने 2003 में 48 लाख का लोन लिया था लेकिन इस तय को दरकिनार कर दिया गया।