दिल्ली विविद्यालय कर रहा है सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी तदर्थ शिक्षकों को मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिया जा रहा है| इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने भारत सरकार, दिल्ली विविद्यालय व अरविंदो कॉलेज से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने तीनों से पूछा है कि जब मातृत्व लाभ अधिनियम किसी प्रतिष्ठान या सरकारी उपक्रम के संविदा कर्मचारियों पर लागू है तो यह दिल्ली विविद्यालय (डीयू) के तदर्थ कर्मचारियों पर क्यों नहीं लागू हो रहा है । न्यायमूर्ति ने सभी से इसका जवाब हलफनामा दाखिल कर देने को कहा है और इस मामले की  सुनवाई 5 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है।

इससे पहले दिल्ली विविद्यालय ने 29 मार्च को कहा था कि महिला शिक्षक की तदर्थ नियुक्ति है। उसे मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता। यह विविद्यालय का नीतिगत मामला है। इसमें कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये। उन्होंने यह बात अरविंदो कॉलेज की एक महिला शिक्षिका की याचिका के जवाब में कहा। शिक्षिका ने अपनी याचिका में कहा है कि उसने 4 जनवरी को विविद्यालय से मातृत्व अवकाश की मांग कर रही है। लेकिन अस्थायी कर्मचारी होने के नाते विविद्यालय उन्हें अवकाश का लाभ नहीं दे रहा है।

उन्होंने कहा कि अवकाश को लेकर विविद्यालय को कई बार आवेदन भेजा, लेकिन विविद्यालय ने इसपर कोई जवाब नहीं दिया। शिक्षिका ने कहा है कि उनकी डिलिवरी डेट 22 फरवरी थी, लेकिन उससे पहले ही 3 फरवरी को बच्चे की मां बन गयी। तब से वह अवैतनिक अवकाश पर हैं जबकि वह छह महीने की मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का लाभ देने को कहा है। इसके बावजूद विविद्यालय उन्हें इस लाभ से वंचित कर रहा है।

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शिवानी रोजगार रथ में रिपोर्ट है। शिवानी ने राजनीति, बिजनेस और अन्य न्यूज़ से संबंधित कई न्यूज़ लिखी है। उन्होंने वर्ष 2014 से रिपोर्टिंग शुरू की थी। दो साल के बाद शिवानी ने वर्ष 2016 से रोजगार रथ में काम करना शुरू किया।