राज्य कर्मचारियों दवारा निजी चिकित्सालय में कराये गये इलाज होंगे कैशलेश

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राज्य कर्मचारियों दवारा निजी चिकित्सालय में कराये गये इलाज होंगे कैशलेश

लखनऊ| सूबे के बीस लाख से अधिक राज्यकर्मियों के साथ ही उनके परिजनों के लिए यह राहत की बात है कि अब वह जरूरी होने पर निजी चिकित्सालयों में अपना कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 अक्टूबर 2018 को एक जनहित याचिका पर आदेश देते हुए राज्य कर्मचारियों को सरकारी चिकित्सालयों के अतिरिक्त किसी भी निजी चिकित्सालय में कराये गये इलाज पर हुए खर्च कि प्रतिपूर्ति पर रोक लगा दी थी। जिससे राज्यकर्मियों व उनके परिजनों को जरूरी होने पर भी निजी अस्पताल में कराये गये उपचार की प्रतिपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इस मुद्दे को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने पिछले दिनों मुख्य सचिव के साथ बैठक कर उच्च न्यायालय के आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से अपना पक्ष मजबूती से रखा था।

श्री तिवारी ने बताया कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के लगातार प्रयासरत रहने के फलस्वरूप शासन ने सर्वोच्च न्यायालय में नामी अधिवक्ताओं के जरिये मजबूती से पैरवी करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर लगाई गई रोक पर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त कर लिया है। जिससे प्रदेश के राज्य कर्मचारी पूर्व की भांति निजी चिकित्सालयों में इलाज करा सकेंगे।इस फैसले से प्रदेश के बीस लाख कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ ही उनके परिजनों को प्राइवेट अस्पताल में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा मुहैया होगी।

राज्य कर्मचारी अब गम्भीर बीमारी से ग्रसित होने पर निजी अस्पताल में अपना उपचार करा सकेंगे। असल में मुख्य सचिव ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रान्तीय अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ 14 दिसम्बर-18 को पुन: चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मुद्दे पर बैठक कर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्य को उच्च न्यायालय के आदेश के पूर्व निजी चिकित्सालयों में कराई गई इलाज की चिकित्सा प्रतिपूर्ति शीघ्र शुरू करने के साथ ही निजी अस्पतालों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति को पूर्व की भांति जारी रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी करने के लिए निर्देशित किया था। राज्य सरकार की ओर से चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में मजबूती से पैरवी कर स्थगन आदेश प्राप्त करने पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के साथ ही अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी स्वागत किया है।