पासपोर्ट के नए नियमों में संशोधन , पुलिस-पब्लिक के लिए बना नया नियम सिरदर्द

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पासपोर्ट के नए नियमों में संशोधन , पुलिस-पब्लिक के लिए बना नया नियम सिरदर्द

नई दिल्ली| पासपोर्ट बनाने का नया नियम प्रदेश पुलिस व जनता दोनों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। नये नियम के अनुसार पुलिस अब पासपोर्ट आवेदक के घर जाकर उसकी इंक्वायरी नहीं करेंगी। इससे मुखबिरों की कमाई बढ़ गयी है। पुलिस पासपोर्ट आवेदक के बारे में जांच में मुखबिरों की सेवाएं ले रही है। मुखबिर आवेदकों से पहले से दोगनी रकम वसूल रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को और आसान करने तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए पहली अप्रैल से पूरे देश में नियमों में संशोधन किया है।

पहले पुलिस पासपोर्ट आवेदक के घर जाकर उसके बारे में जानकारी ले लेती थी। इसके बाद पुलिस थाने में रखे रिकार्ड से जानकारी का मिलान करती थी। पुलिस वह रिपोर्ट एसएसपी को भेज देती है। बाद में एसएसपी रिपोर्ट को ओके करके उसे क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी कार्यालय को भेजता है। उधर पासपोर्ट अधिकारी एलआईयू से भी आवेदक की इंक्वायरी करवाता है। एलआईयू अधिकारी पता लगाते हैं कि कहीं आवेदक देश विरोधी गतिविधियों में तो नहीं संलिप्त है। एसएसपी और एलआईयू की रिपोर्ट ओके होने के बाद विभाग पासपोर्ट जारी कर देता है।

इस व्यवस्था में पासपोर्ट आवेदकों की शिकायत रहती थी कि जांच के नाम पर पुलिस 500 रुपये सुविधा शुल्क लेती है। यह शिकायत विदेश मंत्रालय तक पहुंची। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस समस्या का हल निकाला। एक अप्रैल से प्रदेश पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह पासपोर्ट आवेदक के घर जाकर उसकी जांच नहीं करेगी। इस आदेश के अमल में आने के बाद पुलिस के सामने समस्या खड़ी हो गयी है कि वह आवेदक के बारे में इतनी महत्वपूर्ण जानकारियां कैसे जुटाए। पुलिस मोहल्ले के मुखबिरों की मदद ले रही है।

मुखबिर अब 500 के बजाय 1500 रुपये ले रहे हैं। इस मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि ऐसी समस्याएं आ रही हैं। इस बारे में उच्चाधिकारियों को भी बताया गया है। अंतिम निर्णय को विदेश मंत्रालय ही लेगा।

सात महत्वपूर्ण जांच करती है पुलिस :

प्रदेश पुलिस अधिकारी हर पासपोर्ट आवेदक की नागरिकता, सरकारी सेवा, देश विरोधी गतिविधियां, अपराधिक मुकदमों, पेन्डिंग वारंट के अलावा यह भी पता लगाती है कि कहीं किसी न्यायालय ने देश से बाहर जाने पर रोक तो नहीं लगायी है।

विदेशी मूल के नागरिकों की पहचान सबसे बड़ा संकट :

पुलिस के सामने सबसे बड़ी परेशानी आवेदकों की नागरिकता को लेकर है। प्रदेश ही नहीं देश में तमाम ऐसे लोग हैं जो नेपाल व बांग्ल देश के मूल नागरिक हैं, लेकिन वह सालोें से भारत में रहते हैं। ऐसे लोगों की जानकारी मुखबिर के पास नहीं होती है। ऐसी स्थिति में विदेशी लोगों के भारतीय पासपोर्ट बनने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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विकास ने वर्ष 2014 से टीवी रिपोर्ट के रूप में काम करना शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने कई समाचार चैनल और समाचार वेबसाइट में काम किया। उसके बाद वर्ष 2016 में विकास ने रोजगार रथ में वरिष्ठ संपादक के रूप में काम करना शुरू किया।