एम्स मे डॉक्टरों की नियुक्ति न होने के कारण नहीं मिल पा रहा मरीजों को पर्याप्त लाभ

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एम्स मे डॉक्टरों की नियुक्ति न होने के कारण नहीं मिल पा रहा मरीजों को पर्याप्त लाभ

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में  मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही, वहीं यह संस्थान डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। साल भर में पांच से अधिक फैकल्टी सदस्य एम्स छोड़ चुके हैं। वर्तमान में एम्स के विभिन्न विभागों में 205 फैकल्टी सदस्यों के पद रिक्त हैं। फॉरेंसिक, स्त्री एवं प्रसूति, हेपेटोलॉजी समेत कई विभागों के प्रमुखों के पद जूनियर्स के भरोसे चल रहे हैं। एम्स के वरिष्ठ अधिकारी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में एम्स प्रशासन की संवेदनहीनता को जिम्मेदार मानते हैं।

रिक्त पदों को न भरने की वजह से मरीजों को एम्स का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा। लेकिन 19 डॉक्टर ही चयनित किए गए। यह प्रक्रिया निरंतर चल रही है। एम्स के एमआरडी यूनिट से प्राप्त डाटा के अनुसार वर्ष 2018 में जहां इनडोर और आउटडोर के तहत 23 लाख से अधिक मरीजों को परामर्श व स्वास्य सेवाएं प्रदान की गई। वहीं यह आंकड़ा वर्ष 2017 और 2016 में क्रमश: 8 और 10 फीसद कम दर्ज किया गया था। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि रिक्त स्थाई पदों को भरने के लिए हम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) पर निर्भर हैं। यूपीएससी पांच वर्षो में 9 से अधिक बार अभ्यर्थियों की परीक्षा ले चुका है।

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शिवानी रोजगार रथ में रिपोर्ट है। शिवानी ने राजनीति, बिजनेस और अन्य न्यूज़ से संबंधित कई न्यूज़ लिखी है। उन्होंने वर्ष 2014 से रिपोर्टिंग शुरू की थी। दो साल के बाद शिवानी ने वर्ष 2016 से रोजगार रथ में काम करना शुरू किया।