सरपंच का चुनाव जितने के बाद भी नहीं मिला प्रमाण -पत्र

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सरपंच का चुनाव जितने के बाद भी नहीं मिला प्रमाण -पत्र

मुरैना। जनपद की छिनवरा पंचायत से चुनी गईं अनुसूचित जाति की महिला सरपंच शीला जाटव चुनाव जीतने के तीन साल बाद भी सरपंची करने को तरस रही है। कारण है कि गांव के दबंग रामलखन सिकरवार समेत पंचायत सचिव भूपेंद्र तोमर उसके सील-सिक्कों को लेकर अपने हिसाब से ग्राम पंचायत का संचालन कर रहा है। महिला सरपंच ने आपत्ति ली तो उसे गांव से निकाल दिया गया।

मंगलवार को कलेक्टोरेट में महिला सरपंच शीला जाटव ने बताया कि तीन साल पहले उसने आरक्षित सीट से छिनवरा पंचायत के लिए सरपंच का चुनाव जीता था। चुनाव जीतने के बाद से लेकर आज तक उसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र नहीं मिला है। सरपंच ने बताया कि ऐसा पता लगा कि प्रमाण-पत्र को गुर्जा का रहने वाला रामलखन सिकरवार ले आया। चुनाव के कुछ समय बाद मैंने रामलखन सिकरवार से शिकायत की कि वह सरपंच के नाम की सील लगाकर लिखा-पढ़ी क्यों कर रहा है, उसके बिना हस्ताक्षर कराए ही निर्माण कार्यों के बिल बनाए जा रहे हैं।

सरकारी धन निकाला जा रहा है ऐसा क्यों? इस बात से खफा होकर दबंग रामलखन सिकरवार ने कहा कि हमने चुनाव जिताया है। चुनाव में हमने पैसे खर्च किए हैं इसलिए मुंह बंद करके गांव में रह अन्यथा गांव छोड़कर बाहर चली जा। बाद में दबंगों ने दबाव बनाकर डेढ़ साल पहले उसे छिनवरा गांव से निकाल दिया। इस मजबूरी में वह मुरैना आकर रह रही है। उसे शासन से मिलने वाला कोई भी मानदेय आज तक नहीं मिला है। कभी भी किसी मीटिंग में उसे उपस्थित होने का आमंत्रण नहीं मिला। साथ ही सरपंच होने के नाते निर्णय लेने के अधिकार भी नहीं मिले हैं। अफसर भी उनकी नहीं सुन रहे हैं।
गांव का दबंग रामलखन सरपंच बनकर कर रहा पद का दुरुपयोग ,सचिव की भी मिलीभगत
अनुसूचित जाति की महिला सरपंच शीला जाटव का कहना है कि रामलखन सिकरवार के साथ पंचायत सचिव भूपेन्द्र सिंह तोमर मिला हुआ है। दोनों मिलकर सरकारी योजनाओं के बजट को निकाल रहे हैं और मनमाने तरीके से उसे खर्च कर रहे हैं। मानदेय भी नहीं मिलता इस कारण वह अपने फेंफड़ों की बीमारी का इलाज भी नहीं करा पा रही है। पति भी जिंदा नहीं है अन्यथा उनकी कमाई से इलाज संभव होता। शीला जाटव दो बार प्रशासन से शिकायत कर चुकी है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

-तहसीलदार को जांच के लिए भेज रहे हैं। शिकायत की एक प्रति एसपी को भी फारवर्ड कर दी गई है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।’ -एसके मिश्रा, एडीएम, मुरैना

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नियामत खान रोजगार रथ में संवाददाता के पद पर कार्यरत है। नियामत खान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के क्षेत्र में स्नातक की हासिल की है। नियामत खान को पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी अच्छा अनुभव है। नियामत खान की लेखन, पत्रकारिता, संगीत सुनना में रुची है।