समाचार पत्र एजेंसी खोलने के लिए सरकार देती है भारी सब्सिडी

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भारत में आज समाचार पत्र एजेंसी खोलने का प्रचलन बढ़ गया है। इसका कारण है कि भारत सरकार समाचार पत्र एजेंसी के लिए कई तरह की सब्सिडी इन एजेंसियो को प्रदान करती है। जमीन में सब्सिडी मिलती है जहाँ पर यह समाचार पत्र एजेंसी खोलते है। इसके आलावा बिजली बिल में में सरकार द्वारा छूट दी जाती है।
इस सब्सिडी के आलावा इन एजेंसियो को सरकारी विज्ञापन भी दिये जाते है जिससे यह अपने समाचार पत्र को चलाते रहे। समाचार पत्र को छापने के लिए प्रयोग होने वाले पेपर और स्याही में भी छूट दी जाती है। भारत में यह एक मात्र ऐसा उद्योग है जिसमें सरकार 50 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा सब्सिडी देती है। फिर भी कई समाचार पत्र अपने आप को हमेशा नुकसान में ही दिखाते है।
सरकार को इन समाचार पत्र एजेंसियो को सब्सिडी देने की  बजाये ऑनलाइन मीडिया पर ध्यान देना चाहिए और इनको सब्सिडी प्रदान करना चाहिए। देश में आज ऑनलाइन मीडिया क्षेत्र का सबसे ज्यादा प्रयोग हो रहा है। आम जनता भी अपनी बिजी लाइफ के दौरान समाचार पत्र को पढ़ने के बजाये न्यूज़ वेबसाइट का प्रयोग करना ज्यादा पसंद करती है।
ऑनलाइन मीडिया और ई -पेपर को सरकारी विज्ञापन देने से  सरकार को यह भी पता रहेगा की यह विज्ञापन कितने लोगों तक पंहुचा। वही जमीनों ,बिजली जैसी सब्सिडी देने से सरकार को जो नुकसान हो रहा है उससे भी राहत मिलेंगी।
भारत सरकार को यदि वाक़ई में टैक्स में नुकसान हो रहा है तो समाचार पत्र एजेंसियो की बिना जरूरत वाली छूट को बंद करते हुए उनसे भी टैक्स लेना चाहिए जैसे दूसरे आम उद्योगों से लिया जाता है।
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Vikas das
विकास ने वर्ष 2014 से टीवी रिपोर्ट के रूप में काम करना शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने कई समाचार चैनल और समाचार वेबसाइट में काम किया। उसके बाद वर्ष 2016 में विकास ने रोजगार रथ में वरिष्ठ संपादक के रूप में काम करना शुरू किया।